ग़ज़ल (अख़िरी लम्हें)


बिछड़ कर तुमसे जीलें हमको दुआ ना देना
  अगर मेरी याद आए तो मुस्करा देना 

       दुआ कुबूल हो जाएगी ख़ुदा से कि हुई 
किसी रोते हुए को बस हँसा देना 

दौलत आजतक किसी का प्यार ना ख़रीद सकी 
किसी को यूँ ही मत ठुकरा देना 

ये लकीरें कल बताएंगी वो मेरी नहीं 
अच्छा है अभी इनको मिटा देना 

खेल अपनो से हो तो हार जाना तुम 
अच्छा तो नहीं अपनो को हरा देना 
                              Ankit kumar (9169703431) 





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