अश्को की ज़ुबान


मै रोना नही चाहती
आँसु अपने आप निकल गए
दिल में दबे मोम से अरमान
अश्को के रुप में पिघल गए ।
 
रोका अश्को को थामा अश्को को
पर ये तो आँखियन से बाहर आने को मछल गए
आँखियन  से जो बाहर ये निकले
भड़कती आग की चिंगारी से ये जल गए ।
 
किसी ने मोती समझा किसी ने मात्र पानी
खुशियो को मेरे वे निगल गए
पर अश्को की ठंडक ने सुकून भी दिया
और धीरे-धीरे हम संभल भी गए ।



Comments

Ankit kumar

मछल नहीं मचल गए