मेरे पापा


दूर रही मैं उनसे
और वो मेरे बचपन से ,
फिर भी जुड़े रहे वो मुझसे
मेरी नदनियों और मेरे मन से ।

मैं कहु तो सोना जमी से खोदकर
और तारे आसमान से तोड़कर लादे,
भाई बहन सब गुस्सा करते कि
पापा, दीदी की हर बात माने ।

जब पापा जाते तो मम्मी रोकर कहती
जा रहे है पापा देश की रक्षा करने,
मै खुश होकर कहती तो मम्मी खुश हो जाओ
जा रहे है पापा काम अच्छा करने ।

मै तो सबसे कहते फिरती
पापा मेरे फौज़ में नाम कमा रहे है,
उनके इन्तजार में रहती ,इस आस में के
पापा मेरे अगले महीने छुट्टी  में आ रहे हैं ।

घरवाले कहते पापा तेरे हैं आलसी और सीधे
इसलिए उन्हें छुट्टी नही मिल पाती,
लेकिन उन्हें कौन समझाए कि
सरकार के गुलामो को अब तक नही मिली अज़ादी ।








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