जवाब चाहते प्रश्न



बुजुर्ग भटकने को मजबूर क्यों हैं 
दर-दर झुकने को मजबूर क्यों हैं 
देने वाले हाथ फैले हैं क्यों 
उनकी जिंदगी का ये दस्तुर क्यों है 
क्या मिट गई है मानवता जग से
हर जगह स्वार्थ का बसेरा है 
अपना कौर खिलाने वाला 
क्यों भूखे पेट सो रहा है 
तड़प उठता था माँ का हृदय 
जिस बेटे के तन की तपन से
माँ को भटकता छोड़ वो बेटा
सो रहा है क्यों अमन से
निर्बुद्धि बच्चो के पालक
यूँ थक कर चूर क्यों हैं
बुजुर्ग भटकने को मजबूर क्यों हैं
दर-दर झुकने को मजबूर क्यों हैं
जीवन की पूँजी लगा दी 
जिनकी इच्छापूर्ति में 
बिसर गए दाता को क्यों फिर 
वो बच्चे यश और कीर्ति में 
क्या स्वार्थ बह रहा नव पीढ़ी के 
रग में अविरल धारा सा
भटक रही है क्यों बूढ़ी माँ 
बाप फिरे क्यों मारा सा
सबको गले लगाने वाले 
अपनों से दूर क्यों हैं
बुजुर्ग भटकने को मजबूर क्यों हैं
दर-दर झुकने को मजबूर क्यों हैं                                                    ------ प्रशांत गाहिरे



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