कौन


                     

मै छूना चाहूँ आसमान 
मुझमे हंस सा साहस लाएगा कौन 

मैं फतह करुं हर एवरेस्ट 
पर मेरी मंज़िल तक मुझे पहुंचाएगा कौन

मैं बदल सकूँ सारी दुनिया 
पर मुझमे छुपे ज्वालामुखी को धधकायेगा कौन

हर जगह जल्लाद रूपी दुर्भावना का साया है 
मेरे मन मंदिर को पवित्र कराएगा कौन 

बर्बाद करे आलस्य-रोग मुझे 
कर्मठता की संजीवनी मुझे खिलायेगा कौन 

हैं मेरी आँखों  में ये शहद स्वप्न 
मुझमें मधुमक्खियों सी साधना लायेगा कौन

मैं पाना चाहूँ अध्यात्म-रत्न
ज्ञान के सागर में गोते लगायेगा कौन

गर मैं भी बन जाऊं धन कुबेर 
तो जा सरहद पर लहू बहायेगा कौन 

जो इहः लोक में दुः शाशन से कर्म किये
तो परलोक में परमात्मा से नज़रें मिलायेगा कौन

गर  अर्जुन ही भयभीत हो जाए
तो निज पाखंडियो को सबक सिखाएगा कौन

गर  जीवन के इस महाभारत में नही लड़ा
तो मेरी शौर्यगाथा दुनिया को सुनाएगा कौन 



काव्य रचनाकार

शैलेष पांडे



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Prateek

heart touching