नमक का स्वाद


एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला –“गुरुजी मैं ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ | 
मेरे ज़िन्दगी में परेशानियों और तनाव के सिवाय कुछ भी नही हैं | 
कृपया मुझे सही राह दिखाइए “| 

गुरु ने एक गिलास में पानी भरा और उसमे मुट्ठी भर नमक डाल दिया |
 फिर गुरु ने उस व्यक्ति से पानी पीने को कहा | 
उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया | 

गुरु:- इस पानी का स्वाद कैसा है ?? 
“बहुत ही ख़राब है उस व्यक्ति ने कहा” |

फिर गुरु उस व्यक्ति को पास के तालाब के पास ले गये |
 गुरु ने उस तालाब में भी मुठ्ठी भर नमक डाल दिया फिर उस व्यक्ति से कहा – इस तालाब का पानी पीकर बताओ की कैसा है |
उस व्यक्ति ने तालाब का पानी पिया और बोला – गुरुजी यह तो बहुत ही मीठा है | 

 गुरूजी ने कहा –“बेटा जीवन के दुःख भी इस मुठ्ठी भर नमक के सामान ही है | 
जीवन के दुखों की मात्रा वही रहती है – न ज्यादा न कम | 
लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों का कितना स्वाद लेते हैं | 
यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी सोच एवं ज्ञान को गिलास की तरह सीमित रखकर रोज खारा पानी पीते है या फिर तालाब की तरह बनकर मीठा पानी पीते है |”



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